Posts

Showing posts with the label Life

भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

पशु-पक्षी-बोलते-भी-हैं-और-समझते-भी-हैं

 पशु पक्षी बोल नहीं सकते उनमें  सोचने समझने की शक्ति नहीं होती ये बोलने और समझने का कॉपीराइट तो केवल हमारे पास है घर से गुमा हुआ स्वान दर दर की ठोकर खाकर घर को लौट  आता  है आखिर कैसे वो तो सोच समझ नहीं सकता उसे कुछ याद नहीं रहता सुबह घर से चरने निकली गाये शाम को घर ही लौटती है कई बार सुना होगा "बेज़ुबान पे क्या जोर दिखा रहा है, दम है तो इधर आ" माईने उस पर से बेज़ुबान का टैग तभी हटेगा या तो हम उसके बोलने का तरीका सीख लें ये तो वो हमारा तरीका सीख ले #पशु-पक्षी-बोलते-भी-हैं-और-समझते-भी-हैं

जोड़ियाँ सच मुच उप्पर वाला बनाता है ?

  सुना है उप्पर वाले के काम में कोई भूल नहीं होती फिर भी बनी हुई जोड़ियों को टूटते देखा मैंने दो जिस्म एक जान बिखरते देखा है लड़ते झगड़ते देखा दो प्यार करने वालों को बिछड़ते देखा मैंने जोड़ियाँ उप्पर वाला बनाता है ये जो झूट है  उसे मान लिया मैंने उस उप्पर वाले के नाम पे जो अपने रिश्ते को जामा पहना दिया करते  हो आगे  चल कर  क्यों  उसे फेक उतार दिया करते  हो या तो वो उप्पर वाला झूठा है या रिश्ते  में  तुम्हारे वो दम नहीं है जोड़ियाँ उप्पर वाला बनाता है ये जो झूट है उसे मान लिया मैंने आप भी जितना जल्दी हो सके समझ लो इसे आपके लिए बेहतर होगा आखिर में उसी उप्पर वाले के नाम पे अच्छा हुआ ये तो मेरा परफेक्ट मैच ही नहीं  था ऐसा कहते बहुतों को सुना मैंने जोड़ियाँ उप्पर वाला बनाता है ये जो झूट है उसे मान लिया मैंने   जिस नाम से शुरू हुआ  उसी पे खत्म हुआ  जोड़ियाँ उप्पर वाला बनाता है ये जो झूट है उसे मान लिया मैंने

उम्मीद

 करनी उम्मीद किसी और से मैंने बंद किया दुनिया बदलने का ख्वाब मैंने मंद किया करने गया भला किसी का जब भी अगर कठघरे में खुद से हुआ रूबरू तब तब मगर दिल भी लगा देखा पर उम्मीद  उससे  मैं मगर फिर लगा बैठा  खुश रहने का एक तरीका अपना लिया खुदगरज बनकर जीना खुद को सिख ला लिया

a person, good to you can be evil to others.

एक दिन

  एक दिन  मैं भी रिमोट कण्ट्रोल कार से खेलूँगा यार ये हीरो बनना कितना मुश्किल है  इनको गाना भी पड़ता है  एक दिन  मैं भी स्कूल जाऊँगा  यार ये लोग मुझे उसके पास क्यों नहीं बैठाते कितनी गलत बात है न अगली बार मैं ज़्यादा शैतानी करूँगा एक दिन  मैं भी पेन से लिखूँगा मैं भी निक्कर नहीं पैंट पहनूँगा यार ये टीचर कितनी अच्छी है यार  इन्होने मुझे अपने हाथ से टॉफ़ी खिलाई  एक दिन  ये क्लास 10th क्लियर हो जाए  फिर तो बहुत सारी मस्ती करूँगा  कोई टेंशन ही नहीं फिर तो  एक दिन  बस अपना ये किसी गवर्नमेंट कॉलेज में हो जाए  लाइफ सेट है फिर तो  कॉलेज में फुल्ल ऑन मस्ती  अपुनिच ही भगवन होगा फिर तो  यार ये रौशनी से बात हो जाए तो क्या ही कहने  एक दिन  यार ये एक बार सेमेस्टर खत्म हो जाए बस  फिर तो तेरा भाई कॉलेज में ही नहीं दिखेगा  सीधे गोवा  एक दिन  यार ये एक बार नौकरी लग जाए बस  फिर तो तेरे भाई  की  जेब में होगी दुनिया  आज मैं ऊपर  आसमाँ नीचे आज मैं आगे  ज़माना है पी...

everything is for a reason

 इंसान सब अच्छे और सच्चे  बस हमें उनमें थोड़ा बहुत कुछ पसंद नहीं है  चोर को चोरी भली  बैरी को बैर ठग को ठगी भली  अहंकारी को अहम्  जन्मजात कोई चोर ठग जना नहीं गया  कुछ तो हुआ अजी कुछ तो हुआ   जो चोरी और ठगी को मैं हाँ कर गया  इसमें कुछ गलत भी है  ये मुझे नागवार कर गया  फुरसत में हो तो कभी मिलना  साथ बैठकर खोजेंगे  वो क्या कुछ हुआ  जो चोरी और ठगी को मेरे लिए पाक  और नज़रों में दूसरों की मुझे नापाक कर गया  इंसान सब अच्छे और सच्चे  बस हमें उनमें थोड़ा बहुत कुछ पसंद नहीं है 

दुर्बलता

क्या सचमुच भगवान जैसा कुछ हुआ है या वर्तमान में ऐसा कुछ है ? या उस समय के मनुष्यों में ही प्राकर्तिक रूप से इतना सामर्थ्य था कि आज हमने उन्हें भगवान की उपाधि दे दी है। क्योंकि ये तो हमारी प्रवर्ति रही है कि जो कोई भी हमसे भिन्न जन्मा है या हमसे अधिक सामर्थ्य के साथ जन्मा उसे हम भगवान की उपाधि दे दिया करते हैं। मुझे आज भी याद है की पास के गाँव में किसी कन्या का जन्म तीन हाथों के साथ हुआ था, तब उनके दर्शन के लिए मेला सा लग गया था, मैं भी अपने माता और पिता के साथ उनके दर्शन के लिए गया था।    जिस का जवाब है कि ऐसा इसलिए हो रहा है उसे साइंस का नाम दे दिया जाता है और जो अभी तक नहीं सुलझ पाया उसे भगवान का नाम दे दिया जाता है।   आज का मनुष्य केवल ये सिद्ध करने में लगा है "अहम् ब्रह्मास्मि" अर्थात मैं ही भगवान हूँ। आपुनिच भगवान है।       मानवता, प्रेम, आदि भाव गए भाड़ में। आज अगर कोई मानस अपने छेत्र में अच्छा कार्य कर दे तो उसे भगवान का दर्जा नहीं दिया जाता क्योंकि हमें ये बर्दाश्त ही नहीं है, बजाए इसके कहा जाता है कि "गॉड हास् ब्लेस्ड हिम विथ सम स्पेशल पाव...

इसलिए शायद हम बिगड़ गए

tried to express the emotions of an individual who realised that he/she has achieved nothing despite of having all sort of care & freedom. बाप ने कभी रोका नहीं  कभी टोका नहीं  इसलिए शायद हम बिगड़ गए  माँ ने सोये हुए को  कभी  झोंका नहीं शायद इसीलिए हम बिगड़ गए    दादी-बाबा ने जान से कम कभी मुहब्बत  नहीं  की  दादी-बाबा ने तो  जान से कम कभी मुहब्बत  नहीं  की  फिर भी हम बिगड़ गए  शायद इसीलिए हम बिगड़ गए  शायद इसीलिए हम बिगड़ गए 

Popular posts from this blog

Winning Activity is all about love, care and affection.

बहुत याद आता है..

महसूस होगा

बहन

भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

दुर्बलता

लोगों को बहुत कहते सुना है

दोस्ती

एक दिन

दिल से दिल की मुक्कालात