भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

दोस्ती


                                                                                     
दोस्ती

रिश्ता जो कलम से न लिखा जाये
रिश्ता जिसके बिना न मिटा जाये

रिश्ता जो शब्दों से न सींचा जाये
रिश्ता जो जन्म से न खींचा जाये

रिश्ता जो दिल से जीता और जिया जाये
रिश्ता जो मरते दम तक पिया जाये

रिश्ता जो सभी मतलबों से परे हो
रिश्ता जो कभी भूले से न भूले हो

रिश्ता जो फूल सा कोमल चट्टान सा मजबूत हो
रिश्ता जिसके बिना सब कुछ फीका सा महसूस हो

        दोस्ती यारी 
    सारी आपकी हमारी
        न जाने कब पड़ गयी अच्छे अच्छों पर भारी


Comments

  1. Yara teri yaari ko maine to khuda jana yaad karengi duniya tera mera afsana.

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