भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

दिल से दिल की मुक्कालात


उन्होंने फरमाया आपको क्या पसंद आ गया मुझमें

बड़े प्यार से

उन्होंने फरमाया 

आपको क्या पसंद आया मुझमें.... 

इस सवाल को मैं गोल कर गया 

इस 

सवाल को मैं गोल कर गया 

अपनी मुहब्बत की कोई वजह नहीं देना चाहता था मैं उन्हें



कभी सोंचा न था मुहब्बत पर लिख पाउँगा मैं 

सोंचा न था 

कभी मुहब्बत पे लिख पाउँगा मैं

भला हो आपका 

लिखने बैठा 

हाथ नहीं रोक पाउँगा अब मैं 



इंस्टाग्राम पे न वो फॉलो करती हैं हमें

न ही उन्हें फॉलो करते हैं हम

इंस्टाग्राम पे 

न ही वो फॉलो करती हैं हमें

न ही उनको फॉलो करते हैं हम

उनका तो पता नहीं

उनका....

तो पता नहीं

उनके पोस्ट के कमैंट पर 

पैनी नज़र रखते हैं हम



 आज बेदखल किया हुआ है उन्होंने हमें 

कईयों के कहने के बावजूद 

आज भी दखल दिया हुआ है हमने

बर्दाश्त नहीं बिलकुल

क्योंकि बर्दाश्त नहीं बिलकुल

करनी पड़े मशक्कत 

उन्हें पहुंचने में हम तक

पर

इसे कमज़ोरी न समझ लीजियेगा

तिफ़्ल का गुब्बार है

ज़रा सँभालने में वक्त लगेगा

पर खिदमत में आपकी हर वक्त मिलेगा ये

खिदमत में आपकी 

हर वक्त मिलेगा ये



उनके दोस्तों को खुद पर मुस्कुराते देखा था मैंने 

उनके 

दोस्तों को खुद पर मुस्कुराते देखा था मैंने 

मुझे खुद पर फक्र हुआ 

मुझे 

खुद पर फक्र हुआ 

अपनी मुहब्बत को इस कदर नीलम नहीं किया था मैंने



मुहब्बत मुकम्मल नहीं हुई 

क्या मजबूरी आयी है

मुहब्बत मुकम्मल नहीं हुई 

क्या मजबूरी आयी है

कम्बख्त ये दिल उन्ही में खामियां निकलने बैठ गया 



अपने इश्क़ में इस कदर गिर गए 

दिल दिया जिसे उसे गम कर गए 

बताएँ कैसे शुक्रिया करें आपका 

बताएँ 

कैसे शुक्रिया करें आपका 

न भूलने लायक जो यादें कर गए



आज भी अपने हॉटस्पॉट का नाम और पासवर्ड नहीं बदला मैंने 

आज भी 

अपने हॉटस्पॉट का नाम और पासवर्ड नहीं बदला मैंने 

बस फर्क इतना है 

तब बताने का मन करता था 

अब पूछ्ने वाले जानने पर मज़ाक बनाया करते हैं 



आज भी एक अलग ठाँव रखती हैं वो

आज भी एक अलग ठाँव रखती हैं वो 

गूगल फोटोज़ में 

उनके नाम का आशियाना बना रखा है हमने

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