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Showing posts from May, 2021

भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

दुर्बलता

क्या सचमुच भगवान जैसा कुछ हुआ है या वर्तमान में ऐसा कुछ है ? या उस समय के मनुष्यों में ही प्राकर्तिक रूप से इतना सामर्थ्य था कि आज हमने उन्हें भगवान की उपाधि दे दी है। क्योंकि ये तो हमारी प्रवर्ति रही है कि जो कोई भी हमसे भिन्न जन्मा है या हमसे अधिक सामर्थ्य के साथ जन्मा उसे हम भगवान की उपाधि दे दिया करते हैं। मुझे आज भी याद है की पास के गाँव में किसी कन्या का जन्म तीन हाथों के साथ हुआ था, तब उनके दर्शन के लिए मेला सा लग गया था, मैं भी अपने माता और पिता के साथ उनके दर्शन के लिए गया था।    जिस का जवाब है कि ऐसा इसलिए हो रहा है उसे साइंस का नाम दे दिया जाता है और जो अभी तक नहीं सुलझ पाया उसे भगवान का नाम दे दिया जाता है।   आज का मनुष्य केवल ये सिद्ध करने में लगा है "अहम् ब्रह्मास्मि" अर्थात मैं ही भगवान हूँ। आपुनिच भगवान है।       मानवता, प्रेम, आदि भाव गए भाड़ में। आज अगर कोई मानस अपने छेत्र में अच्छा कार्य कर दे तो उसे भगवान का दर्जा नहीं दिया जाता क्योंकि हमें ये बर्दाश्त ही नहीं है, बजाए इसके कहा जाता है कि "गॉड हास् ब्लेस्ड हिम विथ सम स्पेशल पाव...

महिला सशक्तिकरण

  महिला सशक्तिकरण अर्थात महिलाओं को समाज के महत्वपूर्ण अंग के रूप में स्थापित करना साथ ही समाज के पुरषों को ये बताना कि वे उन्हें ( महिलाओं को ) कम आँकने कि गलती न करें। जितना महत्पूर्ण ये शब्द है उतना महत्पूर्ण यह जानना भी है कि आखिर इसकी आवश्यकता ही क्यों पड़ी। इतिहास को टटोलें तो ज्ञात होता है कि महिलाओं को हमेशा से ही घर का कार्य सँभालने वाली और आनंद का ज़रिया ही माना जाता रहा है। देवताओं के समक्ष उनका नृत्य इसी बात का उदाहरण है। इसी प्रथा को कई जाने माने राजाओं ने भी जारी रखा। जौहर प्रथा , बाल विवाह , घरेलु हिंसा , ऐसी अनेकों यातनाएँ हुईं जिसने यह एहसास कराया कि महिला समाज का ऐसा वर्ग है जिसे विशेष ध्यान कि आवश्यकता है। यहीं से महिला सशक्तिकरण की शुरुआत होती है। आज सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अनेकों योजनाएँ चला रही है। जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं :- 1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम 2. महिलाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम ऐसी कई योजनाएँ हैं जिनका एक मात्रा उद्देश्य केवल इतना है कि समाज में महिलाओं को बराबर का अधिकार मिले , उनको बोझ न समझा जाये , उनको प्रताड़ित न कि...

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