भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

महसूस होगा


tried to express the emotions of an individual while leaving for work or studies after spending a great time with their near and dear ones during lockdown.
                                                                                                                                   
सीरत  का अर्थ शोहरत

घर की महफ़िल से मुहब्बत सी हो गयी 
छोड़कर जाऊँगा , महसूस होगा 

घर के खाने से वफादारी सी हो गयी 
बाहर खाऊँगा , महसूस होगा

हाथ जोड़ नमस्ते करने की आदत सी हो गयी
 हाथ मिलाऊँगा , महसूस होगा 

बिना डॉक्टर डिग्री मास्क पहनने की आदत सी हो गयी 
 मास्क उतारूँगा , महसूस होगा

दोस्तों की महफ़िल 
पता नहीं कहाँ खो गयी 
 महफ़िल सजाऊँगा , महसूस होगा 

प्रवासी मज़दूर की सीरत साफ़ हो गयी
 मज़दूर देखने भर से , महसूस होगा

बचत करने की अहमियत पाक हो गयी 
पैसे उड़ाऊँगा , महसूस होगा

गम सहने की आदत सी हो गयी 
खुशियाँ पाउँगा , 
महसूस होगा 

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