भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

लोगों को बहुत कहते सुना है




लोगों को बहुत कहते सुना है  

पुलिस की नौकरी में बंदिशें बहुत हैं 
पुलिस की नौकरी में खतरे बहुत हैं 
बे वक्त की नौकरी है
लोग हमेशा शक की निगाह से देखते हैं 
जाने से पहले सौ बार सोचते हैं 
उनका आना अपशगुन समझते हैं 
   
लोगों को बहुत कहते सुना है 

पर हम ये क्यों नहीं समझ पाते 
त्योहार तक का उनके कोई ठिकाना नहीं होता 
मौत के आने का कोई फसाना नहीं होता 
बस केवल ढुलते रहना होता है  
महीनों बीत जाते हैं उनको अपनों से मिले 
हम तो चार दिन में ही बौखला जाते हैं 

अजी जनाब इतिहास को तो छोड़ ही दीजिये 
अभी का नज़ारा ही पिरो लीजिये 
घर वालों को तो पता ही नहीं है 
उनका बेटा पति या बाप 
क्या मिल पायेगा उन्हें बहाल 
न खाने की सुध न पीने की सुध 
बस चलता चला जा रहा है   
बस चलता चला जा रहा है 

कहीं बाप की तरह उठक बैठक लगवा रहा है 
कहीं सब्जी तो कहीं दवाई पहुँचा रहा है 
कहीं रिटायरमेंट के बाद भी अपनी ड्यूटी निभा रहा है 
कहीं कहीं तो शादियों का मंडप भी सजवा रहा है 
कहीं कहीं तो हद ही कर दी 
कंधे कम पड़ गए तो बाप बेटा या भाई बन जनाज़ा तक उठवा रहा है 

क्या ज़रुरत है इस सब की 
क्या सरकार उसे इस काम के लिए ही तनख्वा दे रही 
क्योंकि हम तो किसी की सेवा को उसको दी गयी उसकी मज़दूरी से तोलते हैं 
वो तो बस पैसों का भूखा है उसके पास तो दिल ही नहीं है 
ऐसा हम सोचते हैं 

लोगों को बहुत कहते सुना है 

क्या ज़रुरत है इस सब की 
क्योंकि लोगों को तो आखिर में 
उन पर पत्थर लाठियाँ बरसाते ही देखा जा रहा है
रुक रुक कर उसका दिल भी उससे ये कह रहा है 
आखिर क्यों है वो इस नौकरी में 
क्यों वो दो वक्त की रोटी अपने परिवार के साथ नहीं खा पा रहा  
क्यों वो अपने बच्चों के साथ समय नहीं बिता पा रहा 
क्यों वो सब कुछ छोड़ छाड़ सुकून की ज़िंदगी नहीं जी पा रहा  
आखिर क्यों.. 

लोगों को बहुत कहते सुना है 

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