भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया- साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो ज़िद कर रहे हो साथ चलने की ज़रा सम्भलो न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को ज़रा सम्भलो हमने भी कह दिया- नहीं करेंगे साजिश पास आने की न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो आशिक़ हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं साजिशों और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता करनी है मुहब्बत तो उससे करो जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता
अक्सर ऐसा होता है कि दिल में कुछ होता है पर उस आवाज़ को शब्द नहीं मिल पाते। कई बातें होती हैं जो बोलना तो चाहते हैं पर कह नहीं पाते। माँ बापु का धन्यावद करना हो या उनके प्रति अपना प्यार जताना। भाई-बहन या भाई-भाई की आपस की नोकझोक के बाबजूद अपना ख्याल जाताना। और ना जाने कितने ऐसे एहसास, जो ना चाहते हुए भी ज़ुबान में पसर कर अपना दम तोड़ देते हैं। Good news is ऐसे सभी एहसासों को बयाँ करने का एक तरीका है। Which will bring smile to faces and add happiness to lives. वो तरीका है पत्र लिखकर थोड़ी मीठी थोड़ी खट्टी, बात अपने प्रियजन तक पहुँचना। तो यही तो हम करते हैं विनिंग एक्टिविटी में। अपने माँ, पापा, भाई, बहन, दोस्त, गुरु आदि को पत्र लिखकर, उन्हें उनके बारे में अपनी नज़र से बताते हैं। हम उन्हें ये बताते हैं कि वो कितने अच्छे, कितने प्यारे हैं। वो हमारे लिए कितने अनमोल हैं। If you love the concept and wants to write to some special one, do please join us for this event. Event will take place in the following manner: You will join us at the venue. There you will pen down your thoughts on a piece ...
एक बच्चे के अपनी माँ के लिए जज़्बात जिन्हें उसने अपने होश-आवास में गवाँ दिया हो वो बच्चा क्या करेगा अपने दर्द को बयाँ जिसने कभी अपनी माँ का आँचल महसूस ही न हो किया वो लाडला भी क्या करेगा अपने दर्द को बयाँ जिसने कभी अपनी माँ का आँचल महसूस ही न हो किया अरे यारों माँ कि ममता का तो उससे पूछो जिसने अपनी माँ को होश-आवास में दिया हो गवाँ वो बच्चा क्या करेगा अपने दर्द को बयाँ जिसके ऊपर हो माँ का साया वो लाडला भी क...
tried to express the emotions of an individual while leaving for work or studies after spending a great time with their near and dear ones during lockdown. सीरत का अर्थ शोहरत घर की महफ़िल से मुहब्बत सी हो गयी छोड़ कर जा ऊँगा , महसूस होगा घर के खाने से वफादारी सी हो गयी बाहर खा ऊँगा , महसूस होगा हाथ जोड़ नमस्ते करने की आदत सी हो गयी हाथ मिलाऊँगा , महसूस होगा बिना डॉक्टर डिग्री मास्क पहनने की आदत सी हो गयी मास्क ...
उन भाईयों के लिए जिनके पास बहन नहीं है बहन ये तो केवल एक ख्वाब है हमारा रक्षाबन्धन भाई दूज ये तो जैसे अपनी त्योहारों की लिस्ट में हैं ही नहीं अपने हाथ में डोरा बाँधा लेकिन वो भी हमने खुद, नहीं तो पंडित जी ने बाँधा बहन ये तो केवल एक सुनहरा ख्वाब है हमारा कहीं चलते फिरते कोई भाई बुला दे तो हम ये भी नहीं कह सकते " क्या? कुछ कहा क्या ? " क्योंकि ऐसा सुनने क...
भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया- साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो ज़िद कर रहे हो साथ चलने की ज़रा सम्भलो न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को ज़रा सम्भलो हमने भी कह दिया- नहीं करेंगे साजिश पास आने की न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो आशिक़ हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं साजिशों और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता करनी है मुहब्बत तो उससे करो जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता
क्या सचमुच भगवान जैसा कुछ हुआ है या वर्तमान में ऐसा कुछ है ? या उस समय के मनुष्यों में ही प्राकर्तिक रूप से इतना सामर्थ्य था कि आज हमने उन्हें भगवान की उपाधि दे दी है। क्योंकि ये तो हमारी प्रवर्ति रही है कि जो कोई भी हमसे भिन्न जन्मा है या हमसे अधिक सामर्थ्य के साथ जन्मा उसे हम भगवान की उपाधि दे दिया करते हैं। मुझे आज भी याद है की पास के गाँव में किसी कन्या का जन्म तीन हाथों के साथ हुआ था, तब उनके दर्शन के लिए मेला सा लग गया था, मैं भी अपने माता और पिता के साथ उनके दर्शन के लिए गया था। जिस का जवाब है कि ऐसा इसलिए हो रहा है उसे साइंस का नाम दे दिया जाता है और जो अभी तक नहीं सुलझ पाया उसे भगवान का नाम दे दिया जाता है। आज का मनुष्य केवल ये सिद्ध करने में लगा है "अहम् ब्रह्मास्मि" अर्थात मैं ही भगवान हूँ। आपुनिच भगवान है। मानवता, प्रेम, आदि भाव गए भाड़ में। आज अगर कोई मानस अपने छेत्र में अच्छा कार्य कर दे तो उसे भगवान का दर्जा नहीं दिया जाता क्योंकि हमें ये बर्दाश्त ही नहीं है, बजाए इसके कहा जाता है कि "गॉड हास् ब्लेस्ड हिम विथ सम स्पेशल पाव...
दोस्ती रिश्ता जो कलम से न लिखा जाये रिश्ता जिसके बिना न मिटा जाये रिश्ता जो शब्दों से न सींचा जाये रिश्ता जो जन्म से न खींचा जाये रिश्ता जो दिल से जीता और जिया जाये रिश्ता जो मरते दम तक पिया जाये रिश्ता जो सभी मतलबों से परे हो रिश्ता जो कभी भूले से न भूले हो रिश्ता जो फूल सा कोमल चट्टान सा मजबूत हो रिश्ता जिसके बिना सब कुछ फीका सा महसूस हो दोस्ती यारी सारी आपकी हमारी न जाने कब पड़ गयी अच्छे अच्छों पर भारी
एक दिन मैं भी रिमोट कण्ट्रोल कार से खेलूँगा यार ये हीरो बनना कितना मुश्किल है इनको गाना भी पड़ता है एक दिन मैं भी स्कूल जाऊँगा यार ये लोग मुझे उसके पास क्यों नहीं बैठाते कितनी गलत बात है न अगली बार मैं ज़्यादा शैतानी करूँगा एक दिन मैं भी पेन से लिखूँगा मैं भी निक्कर नहीं पैंट पहनूँगा यार ये टीचर कितनी अच्छी है यार इन्होने मुझे अपने हाथ से टॉफ़ी खिलाई एक दिन ये क्लास 10th क्लियर हो जाए फिर तो बहुत सारी मस्ती करूँगा कोई टेंशन ही नहीं फिर तो एक दिन बस अपना ये किसी गवर्नमेंट कॉलेज में हो जाए लाइफ सेट है फिर तो कॉलेज में फुल्ल ऑन मस्ती अपुनिच ही भगवन होगा फिर तो यार ये रौशनी से बात हो जाए तो क्या ही कहने एक दिन यार ये एक बार सेमेस्टर खत्म हो जाए बस फिर तो तेरा भाई कॉलेज में ही नहीं दिखेगा सीधे गोवा एक दिन यार ये एक बार नौकरी लग जाए बस फिर तो तेरे भाई की जेब में होगी दुनिया आज मैं ऊपर आसमाँ नीचे आज मैं आगे ज़माना है पी...
उन्होंने फरमाया आपको क्या पसंद आ गया मुझमें बड़े प्यार से उन्होंने फरमाया आपको क्या पसंद आया मुझमें.... इस सवाल को मैं गोल कर गया इस सवाल को मैं गोल कर गया अपनी मुहब्बत की कोई वजह नहीं देना चाहता था मैं उन्हें कभी सोंचा न था मुहब्बत पर लिख पाउँगा मैं सोंचा न था कभी मुहब्बत पे लिख पाउँगा मैं भला हो आपका लिखने बैठा हाथ नहीं रोक पाउँगा अब मैं इंस्टाग्राम पे न वो फॉलो करती हैं हमें न ही उन्हें फॉलो करते हैं हम इंस्टाग्राम पे न ही वो फॉलो करती हैं हमें न ही उनको फॉलो करते हैं हम उनका तो पता नहीं उनका.... तो पता नहीं उनके पोस्ट के कमैंट पर पैनी नज़र रखते हैं हम आज बेदखल किया हुआ है उन्होंने हमें कईयों के कहने के बावजूद आज भी दखल दिया हुआ है हमने बर्दाश्त नहीं बिलकुल क्योंकि बर्दाश्त नहीं बिलकुल करनी पड़े मशक्कत उन्हें पहुंचने में हम...
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