भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

पशु-पक्षी-बोलते-भी-हैं-और-समझते-भी-हैं


 पशु पक्षी बोल नहीं सकते

उनमें सोचने समझने की शक्ति नहीं होती

ये बोलने और समझने का कॉपीराइट तो केवल हमारे पास है


घर से गुमा हुआ स्वान

दर दर की ठोकर खाकर घर को लौट आता है

आखिर कैसे

वो तो सोच समझ नहीं सकता

उसे कुछ याद नहीं रहता

सुबह घर से चरने निकली गाये

शाम को घर ही लौटती है


कई बार सुना होगा

"बेज़ुबान पे क्या जोर दिखा रहा है, दम है तो इधर आ"

माईने उस पर से बेज़ुबान का टैग तभी हटेगा

या तो हम उसके बोलने का तरीका सीख लें

ये तो वो हमारा तरीका सीख ले


#पशु-पक्षी-बोलते-भी-हैं-और-समझते-भी-हैं

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