भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

everything is for a reason


 इंसान सब अच्छे और सच्चे 

बस हमें उनमें थोड़ा बहुत कुछ पसंद नहीं है 

चोर को चोरी भली 

बैरी को बैर

ठग को ठगी भली 

अहंकारी को अहम् 



जन्मजात कोई चोर ठग जना नहीं गया 

कुछ तो हुआ

अजी कुछ तो हुआ  

जो चोरी और ठगी को मैं हाँ कर गया 


इसमें कुछ गलत भी है 

ये मुझे नागवार कर गया 


फुरसत में हो तो कभी मिलना 

साथ बैठकर खोजेंगे 

वो क्या कुछ हुआ 

जो चोरी और ठगी को मेरे लिए पाक 

और नज़रों में दूसरों की मुझे नापाक कर गया 

इंसान सब अच्छे और सच्चे 

बस हमें उनमें थोड़ा बहुत कुछ पसंद नहीं है 

Comments

Popular posts from this blog

Winning Activity is all about love, care and affection.

बहुत याद आता है..

महसूस होगा

बहन

भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

दुर्बलता

लोगों को बहुत कहते सुना है

दोस्ती

एक दिन

दिल से दिल की मुक्कालात