भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

यार तू कहाँ


                                                                                                          
या......र तू कहाँ.....
मुझे बता..... 
ओ यारा 
या......र तू कहाँ.....
मुझे बता.....        

पैसों की कीमत 
क्या रिश्तों से ऊपर

एक दोस्त मेरा पक्का
कुछ रोज़ पहले मुझे छोड़ गया
क्यों
क्योंकि पैसों की कीमत
वो मुझसे ऊपर तोल गया

या......र तू कहाँ.....
मुझे बता..... 
ओ यारा 
या......र तू कहाँ.....
मुझे बता.....

तू रुक
ज़रा ठहरजा
पहले से कितना बदल गया
ये ज़रा समझ जा
आज कल तो लोग
पड़ोसी को नहीं पहचान रहे
पहचान रहे अगर
तो उसके सुख को नहीं मान रहे

रिश्तों को पीछे छोड़ पैसों के चक्कर में
जीवन के सच्ची मोती खोल रहे
कोर्ट में गवाह पलट जा रहे
इंसान की इंसानियत के कतल हो जा रहे
हम इतने भूखे हो जा रहे
पता नहीं कहाँ खो जा रहे
हम ये नहीं समझ पा रहे
जिससे हम रिश्ते नहीं खरीद पा रहे
तो क्यों उसके चक्कर में
अपनों को दूर भगा रहे
अपनों को दूर भगा रहे

या......र तू कहाँ.....
मुझे बता..... 
ओ यारा 
या......र तू कहाँ.....
मुझे बता.....

रुक जा
संभल जा
अभी वक्त बचा है तेरे पास
जा कुछ वक्त बिता
अपनों के साथ अपनों के पास
तड़प रहे हैं वो और तू भी तड़प रहा
बस बहकावे में तू
खुद को रख रहा

या......र तू कहाँ.....
मुझे बता..... 
ओ यारा 
या......र तू कहाँ.....
मुझे बता.....

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