भरी महफ़िल में महोतरमा ने फ़रमाया-

  भरी  महफ़िल  में  महोतरमा ने फ़रमाया-  साजिश कर रहे हो पास आने की ज़रा सम्भलो  ज़िद कर रहे हो साथ चलने की  ज़रा सम्भलो  न मिलता इश्क़ ऐसे बोलने से क्या करोगे तुम  मर जाते हैं आशिक़ इश्क़ पाने को  ज़रा सम्भलो  हमने भी कह दिया-  नहीं करेंगे साजिश पास आने की  न ही करेंगे ज़िद साथ चलने की अरे हम तो वो  आशिक़  हैं जो एक मर्तबा मुहब्बत का इज़हार करते हैं  आपकी मर्ज़ी खुदा का फरमान समझते हैं  साजिशों  और ज़िदों से इश्क़ पाया नहीं जाता  आशिकी में मरा हुआ आशिक़ कहलाया नहीं जाता  करनी है मुहब्बत तो उससे करो  जिसे तुम्हारे बिन रात दिन भाया नहीं जाता 

एक गृहणी क्या चाहती है ...


                                                                                                                                                     
एक गृहणी क्या चाहती है 
थोड़ा सा प्यार , दुलार , और अपनों का साथ आपार

कितनी सी होती है उसकी ज़िन्दगी
केवल चार दीवारी की
हम तो एक दिन के जनता कर्फूय में भी ठीक से घर पर नहीं रुक पाए
पर सोचों उसके बारे में सुबह से शाम और रात हो जाती है सड़क देखे
कितना संघर्षपूर्ण जीवन है एक स्त्री का
जिस घर में पैदा हुई
शादी तक समय बिताया
सो कॉल्ड स्कूल फ्रेंड्स बनाये
पिता जैसा रक्षक पाया
भाई-बहन , चाचा-चाची
वो गालियाँ 
खूबसूरत यादें
एक रात में सब ख़तम
पलक झपकते ही सब बदल गया
सब एक खूबसूरत सपने जैसा हो गया

नया घर
नए लोग
अपने पिता की आँख का तारा दूर हो गया
सास मिली
लेकिन पता नहीं वो कभी माँ भी बन पायेगी या नहीं
ससुर मिले
लेकिन पता नहीं वो कभी रक्षक भी बन पायेंगे या नहीं
नया शहर
कितना मुश्किल है ये बदलाव
सोचके देखा , रोंगटे खड़े हो गए

एक गृहणी क्या चाहती है
थोड़ा सा प्यार , दुलार और अपनों का साथ आपार

एक लड़की की जगह अपने आप को रख कर देखो
कैसा लगेगा तुम्हें जब तुम्हारा घर जिसमें सारी तुम्हारी यादें हैं ,
उसे बदल दिया जाये और उस घर को तुम्हारा पहला नहीं दूसरा घर बताया जाये
कैसा लगेगा तुम्हें जब तुमसे ये कहा जाये
की आज से ये तुम्हारी माता और ये तुम्हारे पिता जी
ये सोंचना भी बहुत मुश्किल है

जिस पिता के घर में बेटी का जन्म होता है
उसके दिमाग में न चाहते हुए भी ये ख्याल आता है
पराया धन जन्मा है
धन पराया माना जाता है
इसलिए ये कहा भी जाता है
"अपने बापू का छोरा हूँ मैं"

एक गृहणी क्या चाहती है
थोड़ा सा प्यार , दुलार और अपनों का साथ आपार

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